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4 साल के लिए बंद हुई दुनिया की सबसे ताकतवर मशीन! 2030 में लौटेगी तो खुल सकते हैं ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य

 


दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली वैज्ञानिक मशीन लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (Large Hadron Collider - LHC) अब अगले कुछ वर्षों तक शांत रहने वाली है। फ्रांस और स्विट्जरलैंड की सीमा के पास स्थित यह विशाल कण त्वरक (Particle Accelerator) अपने निर्धारित चार वर्षीय लॉन्ग शटडाउन में प्रवेश कर चुका है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह कोई सामान्य तकनीकी बंदी नहीं, बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी वैज्ञानिक छलांग की तैयारी है।

29 जून को इस विशाल मशीन को पूरी तरह बंद कर दिया गया। अब इसमें व्यापक तकनीकी बदलाव और अत्याधुनिक अपग्रेड किए जाएंगे। इसके बाद वर्ष 2030 में यह एक नए स्वरूप हाई-ल्युमिनोसिटी लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (High-Luminosity Large Hadron Collider - HL-LHC) के रूप में दोबारा शुरू होगी।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अपग्रेड के बाद यह मशीन पहले की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली होगी और ब्रह्मांड के उन रहस्यों तक पहुंचने में मदद कर सकती है, जिन्हें विज्ञान दशकों से समझने की कोशिश कर रहा है। इनमें डार्क मैटर, डार्क एनर्जी, एंटीमैटर और ब्रह्मांड की उत्पत्ति जैसे बड़े प्रश्न शामिल हैं।

आखिर क्या है लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर?

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली पार्टिकल एक्सीलरेटर है। इसे यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन CERN ने विकसित किया है।

यह मशीन जिनेवा के पास फ्रांस और स्विट्जरलैंड की सीमा के नीचे लगभग 27 किलोमीटर लंबे भूमिगत सुरंगनुमा रिंग में स्थापित है।

इसका मुख्य कार्य अत्यधिक ऊर्जा पर प्रोटॉन जैसे सूक्ष्म कणों को लगभग प्रकाश की गति से एक-दूसरे से टकराना है। इन टक्करों से उत्पन्न होने वाले परिणामों का अध्ययन करके वैज्ञानिक पदार्थ, ऊर्जा और ब्रह्मांड की मूल संरचना को समझने का प्रयास करते हैं।

चार साल के लिए क्यों किया गया बंद?

LHC को बंद करने का उद्देश्य किसी खराबी को ठीक करना नहीं, बल्कि उसकी क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।

वर्तमान शटडाउन को Long Shutdown 3 (LS3) कहा जा रहा है। इस दौरान मशीन के हजारों तकनीकी हिस्सों को बदला जाएगा और नई तकनीकों को जोड़ा जाएगा।

इस परियोजना का लक्ष्य मशीन की ल्युमिनोसिटी यानी कणों की टक्कर कराने की क्षमता को लगभग 10 गुना तक बढ़ाना है।

अधिक टक्कर होने का अर्थ है कि वैज्ञानिकों को पहले की तुलना में कहीं अधिक डेटा मिलेगा। यही अतिरिक्त डेटा नई वैज्ञानिक खोजों का आधार बनेगा।

अब पहले से 10 गुना ज्यादा होगी क्षमता

वैज्ञानिकों के अनुसार नया हाई-ल्युमिनोसिटी LHC अपने पुराने डिजाइन की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक डेटा उपलब्ध कराएगा।

इसके कारण प्रोटॉन टक्करों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी और दुर्लभ घटनाओं को पकड़ने की संभावना भी बढ़ेगी।

इस परियोजना के प्रमुख मार्कस जर्लौथ ने कहा कि यह वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण क्षण है और अब पूरी टीम नए चरण में प्रवेश कर रही है।

उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में किया जाने वाला यह अपग्रेड आने वाले दशकों की वैज्ञानिक खोजों की नींव रखेगा।

हिग्स बोसोन की खोज ने बदल दी थी विज्ञान की दुनिया

LHC का सबसे बड़ा योगदान वर्ष 2012 में सामने आया था, जब वैज्ञानिकों ने हिग्स बोसोन नामक कण की पुष्टि की।

हिग्स बोसोन को लोकप्रिय रूप से "गॉड पार्टिकल" भी कहा जाता है, हालांकि वैज्ञानिक समुदाय इस नाम का औपचारिक उपयोग नहीं करता।

इस खोज ने यह समझने में मदद की कि ब्रह्मांड के मूलभूत कणों को द्रव्यमान (Mass) कैसे प्राप्त होता है।

यह आधुनिक भौतिकी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।

अब तक LHC लगभग 5.5 करोड़ हिग्स बोसोन उत्पन्न कर चुका है।

अपग्रेड के बाद क्या बदलेगा?

हाई-ल्युमिनोसिटी संस्करण के शुरू होने के बाद वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मशीन अपने जीवनकाल में लगभग 38 करोड़ हिग्स बोसोन उत्पन्न कर सकेगी।

इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्ध डेटा से वैज्ञानिक हिग्स बोसोन के गुणों का पहले से कहीं अधिक विस्तार से अध्ययन कर पाएंगे।

इसके अलावा स्टैंडर्ड मॉडल में मौजूद कई अनसुलझे सवालों के उत्तर खोजने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

क्या डार्क मैटर का रहस्य सुलझ पाएगा?

ब्रह्मांड का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा अभी भी वैज्ञानिकों के लिए पूरी तरह रहस्य बना हुआ है।

वैज्ञानिकों के अनुसार केवल लगभग 5 प्रतिशत ब्रह्मांड ही सामान्य पदार्थ से बना है, जबकि बाकी हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी के रूप में मौजूद माना जाता है।

आज तक डार्क मैटर को सीधे तौर पर देखा नहीं जा सका है।

नई मशीन से मिलने वाले विशाल डेटा की मदद से वैज्ञानिक उम्मीद कर रहे हैं कि वे डार्क मैटर के संकेतों को अधिक स्पष्ट रूप से पहचान सकेंगे।

यदि ऐसा होता है तो यह आधुनिक विज्ञान की सबसे बड़ी खोजों में शामिल हो सकती है।

एंटीमैटर पर भी मिलेगी नई जानकारी

एंटीमैटर भी आधुनिक भौतिकी का सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है।

सिद्धांत के अनुसार बिग बैंग के समय पदार्थ और प्रतिपदार्थ (Antimatter) बराबर मात्रा में बने होंगे।

लेकिन आज ब्रह्मांड में सामान्य पदार्थ मौजूद है जबकि एंटीमैटर लगभग गायब है।

ऐसा क्यों हुआ?

यह प्रश्न दशकों से वैज्ञानिकों को परेशान कर रहा है।

LHC के नए संस्करण से मिलने वाला डेटा इस रहस्य को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अपग्रेड में लगेगी अत्याधुनिक तकनीक

इस परियोजना के दौरान केवल मशीन के भीतर ही लगभग 1.2 किलोमीटर लंबे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट सिस्टम को बदला जाएगा।

इसके अलावा पूरे परिसर में दर्जनों इंजीनियरिंग परियोजनाएं चलाई जाएंगी।

इस विशाल मिशन में दुनिया भर के हजारों इंजीनियर, वैज्ञानिक, तकनीशियन और विशेषज्ञ भाग लेंगे।

LS3 परियोजना के समन्वय प्रमुख जीन-फिलिप टॉक के अनुसार यह अब तक की सबसे जटिल इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक है।

मशीन बंद रहेगी, लेकिन शोध नहीं रुकेगा

कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब मशीन बंद रहेगी तो वैज्ञानिक क्या करेंगे?

असल में LHC ने पिछले वर्षों में अरबों कण टक्करों का विशाल डेटा एकत्र किया है।

अब अगले चार वर्षों के दौरान वैज्ञानिक इसी डेटा का गहन विश्लेषण करेंगे।

डेटा विश्लेषण से नई खोजें लगातार सामने आती रहेंगी, इसलिए शोध कार्य बिल्कुल नहीं रुकेगा।

आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?

LHC का मुख्य उद्देश्य मूलभूत विज्ञान की खोज करना है, लेकिन इसके लिए विकसित कई तकनीकों का उपयोग आज आम जीवन में भी हो रहा है।

CERN में विकसित कई अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग—

  • मेडिकल इमेजिंग

  • कैंसर उपचार

  • रेडिएशन थेरेपी

  • डेटा प्रोसेसिंग

  • सुपरकंप्यूटिंग

  • आर्ट रेस्टोरेशन

  • हाई-स्पीड कंप्यूटिंग

जैसे क्षेत्रों में पहले से किया जा रहा है।

भविष्य में विकसित होने वाली नई तकनीकें भी चिकित्सा, उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

2040 तक करेगा काम

वैज्ञानिकों के अनुसार हाई-ल्युमिनोसिटी LHC वर्ष 2030 से शुरू होकर लगभग 2040 के दशक तक लगातार वैज्ञानिक प्रयोग करेगा।

इसके बाद भविष्य में इससे भी अधिक शक्तिशाली नई पीढ़ी के पार्टिकल एक्सीलरेटर विकसित किए जा सकते हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी वैज्ञानिक मशीन का चार वर्षों के लिए बंद होना किसी परियोजना का अंत नहीं, बल्कि विज्ञान के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। हाई-ल्युमिनोसिटी लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर के रूप में इसकी वापसी मानव इतिहास की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों का रास्ता खोल सकती है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह मशीन डार्क मैटर, एंटीमैटर, हिग्स बोसोन और ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़े उन सवालों के जवाब खोजने में मदद करेगी, जिनका इंतजार पूरी दुनिया दशकों से कर रही है। यदि यह मिशन सफल रहा, तो यह केवल भौतिकी ही नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की वैज्ञानिक समझ को भी एक नए स्तर पर पहुंचा सकता है।

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